ओझल
Sakshi
- One minute read - 59 wordsबेरंग सी दिखने लगी सारी सड़कें
जब आंखों से तुम ओझल हुए
मन में कितने ख्याल थे मेरे
जो आसुओं की बारिश में धुल गए
यूं तो सर्दी की शाम थी तब
चाय की चुस्की के बहाने ही रुक जाते
या डर था कि पूछ लूंगी मैं वो सवाल
जिससे तुम हमेशा हो कतराते –
क्या जाना ज़रूरी है?
