फ़रवरी की बारिश
Sakshi
- One minute read - 179 wordsफ़रवरी के महीने में बारिश?
बारिश की बूंदे इस कोहरे भरी खिड़की पर थपकी दे रहीं थीं। रात के सन्नाटे में ये सुकून भरी आवाज़ जैसे एक लोरी की तरह थी। एक तरफ की खिड़की खोली तो मंद हवा एक भीनी सी खुशबू अपने साथ लिए मेरे बिस्तर पर बैठ गई। जास्मिन के फूलों की लगती है। मैं लोरी सुनते सो गई।
सुबह उठी देखा चारो तरफ पत्ते बिखरे पड़े थे। नीम के पेड़ की वो डंगाल टूट कर गिर गई जिसपे गौरैये का घोसला था। जास्मिन के फूल भी टूट कर गिर गए। आज सुबह कोई हलचल नहीं है। लोग धूप में खड़े हो कर चाय की चुस्की नहीं ले रहे। ना ही आसपास के कुत्ते भ्रमण के लिए निकले। दुबक कर, थरथराते हुए, ठंड और बारिश से लड़ रहे हैं।
जिसे मैं मंद हवा समझ बैठी, वो तो तूफान निकला। सोचने का समय ही नहीं मिला और एक तूफान जैसे अपने साथ क्या कुछ ले गया। अब सब कुछ कितना बदला बदला सा लग रहा है।
सच कह रहीं थीं बुआ, अब सब पहले जैसा नहीं लगता।